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Friday, March 24, 2017

अदालत नहीं, संसद तय करेगी पेंशन,  पूर्व सांसदों को पेंशन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सरकार ने किया साफ

⚫  राज्यसभा में वित्तमंत्री बोले, सरकारी धन खर्च करने का हक सिर्फ संसद का

⚫  दूसरी संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता में दखल देने से बचे न्यायपालिका

नई दिल्ली : पूर्व सांसदों को पेंशन देने के मामले में सर्वोच्च अदालत की तीखी टिप्पणी पर सरकार ने भी न्यायपालिका को कड़ा जवाबी संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को लेकर बिफरे सांसदों से राज्यसभा में रुबरू होते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सांसदों को कितनी पेंशन मिलना चाहिए यह तय करने का अधिकार केवल संसद का है। 1उन्होंने साफ कहा कि सरकारी धन को कैसे और कहां खर्च करना है, यह तय करना सिर्फ संसद का अधिकार है।

 वित्तमंत्री ने इस क्रम में साफ संदेश दिया कि न्यायपालिका को अपने अधिकार क्षेत्र की मर्यादा से बाहर जाकर दूसरी संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता में दखल देने से बचना चाहिए। राज्यसभा में जेटली ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर एतराज जाहिर कर रहे सांसदों को शांत करने के दौरान यह बात कही।  वित्तमंत्री ने कहा कि संवैधानिक प्रावधान शीशे की तरह साफ है कि सरकारी धन को खर्च करने का अधिकार केवल और केवल संसद को है। किसी दूसरी संस्था के इसमें दखल की कहीं कोई गुंजाइश नहीं है। इसलिए किसे पेंशन देनी है और पेंशन की राशि कितनी होनी चाहिए यह संसद ही तय करेगी।

दरअसल, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसदों को मिलने वाली पेंशन और भत्ताें को खत्म करने की याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस भेजा। जस्टिस जे. चेलमेश्वर के नेतृत्व वाली पीठ ने गैर सरकारी संगठन ‘लोक प्रहरी’ की याचिका पर लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को नोटिस जारी किया। याचिका के मुताबिक, कार्यकाल खत्म होने के बाद भी पेंशन और भत्ते जारी रखना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है। ये भी कहा गया कि बिना कानून बनाए सांसदों को लाभ दिलाने का अधिकार संसद को नहीं है।

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