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Thursday, August 25, 2016

हाई कोर्ट ने खारिज कर दी दरोगा भर्ती प्रक्रिया

लखनऊ हाईकोर्ट ने परीक्षा परिणाम रद्द किया ,सरकार को तगड़ा झटका-

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4010 पदों पर दरोगा भारती की प्रक्रिय रद्द, हाईकोर्ट ने लिखित परीक्षा फिर से कराकर भर्ती करने का दिया आदेश
4010 पदों पर दरोगा भारती की प्रक्रिय रद्द, हाईकोर्ट ने लिखित परीक्षा फिर से कराकर भर्ती करने का दिया आदेश

विधि संवाददाता, लखनऊ : हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने वर्ष 2011 में शुरू की गई दारोगा भर्ती प्रक्रिया के तहत जून 2015 में जारी 4010 दारोगा व प्लाटून कमांडरों की चयनित सूची रद कर दी है। न्यायमूर्ति राजन रॉय ने बुधवार को दिए फैसले में राज्य सरकार को लिखित परीक्षा के आधार पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए उसे पूरी कर नई चयन सूची बनाने के आदेश दिए हैं।
याची अभिषेक कुमार सिंह के अधिवक्ता रजत राजन सिंह ने बताया कि न्यायालय ने बीती 26 मई को ही फैसला सुरक्षित कर लिया था और जिसे बुधवार को सुनाया गया। अधिवक्ता के अनुसार न्यायालय के फैसले से उन अभ्यर्थियों को झटका लगा है जिनकी दारोगा की ट्रेनिंग जल्द ही पूरी होने वाली है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में दारोगा व प्लाटून कमांडरों के 4010 पदों पर भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की गई। वर्ष 2014 में लिखित परीक्षा की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। 26 जून 2015 को सरकार ने चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी कर दी। इस पर कई विफल अभ्यर्थियों ने न्यायालय में याचिकाएं दायर कर चयन सूची को चुनौती दी थी। याचियों की ओर से दलील दी गई कि क्षैतिज आरक्षण को गलत तरीके से लागू किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम सौ अंक निर्धारित किए गए थे, लेकिन कई ऐसे अभ्यर्थियों को भी लिखित परीक्षा में बैठाया गया था, जिनके अंक 100 से कम थे। याचिका में कहा गया कि नियमों के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में से कुल पदों के तीन गुना अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में बुलाना था, लेकिन इसके विपरीत पांच से छह गुना अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के लिए बुलाया गया। दलील दी गई कि जीडी की वीडियो रिकॉर्डिग भी नहीं कराई गई।।वर्ष 2011 में आरंभ इस भर्ती प्रक्रिया में पहले भी अदालत कई निर्णय दे चुकी है। भर्ती हो चुके अधिकतर उप निरीक्षकों का प्रशिक्षण पूरा होने वाला है और अब राज्य सरकार उन्हें बचाने के हर संभव यत्न करेगी। वैसे भी अखिलेश सरकार चाहेगी कि यह चुनावी मुद्दा न बने।

तथ्य--

1-यह भर्ती प्रकिया मई 2011 में बसपा सरकार के कार्यकाल में प्रारम्भ हुई थी! प्रारम्भिक लिखित परीक्षा से एक माह पूर्व भर्ती बोर्ड ने परीक्षा के लिए अनुदेश जारी किये, जिसके अनुसार हर विषय में40% व कुल 50% अंक लाने वाले अभ्यार्थी ही सफल घोषित किये जायेंगे, जिसके आधार पर 11दिसम्बर 2011 को प्रारम्भिक परीक्षा सम्पन्न हुई। प्रारम्भिक लिखित परीक्षा का परिणाम 1 जनवरी2013 को घोषित किया गया।
2- प्रारम्भिक लिखित परीक्षा के विरूद्ध हर विषय में 40% अंक लाने में विफल परन्तु कुल50% अंक लाने वाले अभ्यार्थियों ने माननीय उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश की लखनऊ खण्डपीठ में याचिका संख्या S.S.91/2013 दायर की, जिस पर माननीय न्यायाधीश महोदय ने 23/1/13 को निर्णय दिया कि आपको पूर्व ही सूचित किया जा चुका था कि 40%प्रत्येक खण्ड में प्राप्त करना अनिवार्य है और आपने परिणाम घोषित होने के पश्चात याचिका दायर की है इसलिए आपकी अपील ख़ारिज की जाती है।

3- इस भर्ती प्रकिया के लिए शारीरिक, दक्षता परीक्षा 5फरवरी 2013 को शुरू हुई, परन्तु 18 फरवरी को दौड़ लगते समय एक अभ्यार्थी की मृत्यु हो जाने से इसे रोक दिया गया।
4- इस भर्ती प्रकिया में भर्ती बोर्डद्वारा शारीरिक दक्षता परीक्षा में संसोधन कर 10किमी० की दौड़ को 4.8 किमी० कर दिया गया और प्रकिया पुनः 5 जुलाई 2013 को प्रारम्भ गयी जिस पर माननीय उच्च न्यायलय इलाहाबाद द्वारा रोक लगाये जाने के कारण दिनांक 7 जुलाई 2013 को प्रकिया रोक दी गयी!

5- इसके पश्चात भर्ती बोर्ड द्वारा इस भर्ती को रद्द कर दिया गया जिसके विरूद्ध अभ्यार्थियों ने माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका संख्या WRIT-A- 5576/2013 दायर की जिस पर माननीय न्यायाधीश महोदय ने दिनांक 9/12/2013 को  मूल विज्ञप्ति के अनुसार भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने का आदेश दिया।

6-इस भर्ती प्रकिया में दिनांक 25/07/13 को माननीय उच्च न्यायालय की एक सदस्यीय पीठ ने याचिका संख्या WRIT-A-1476/2013 व 62 अन्य में आदेश दिया कि प्रारम्भिक लिखित परीक्षा में कुल50% अंक प्राप्त करने वाले अभ्यार्थी सफल घोषितकिये जाये और प्रत्येक विषय में न्यूनतम 40% प्राप्तकरने की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया जबकि यह मुद्दा याचिका संख्या S.S 91 /2013 द्वारा निस्तारित किया जा चुका था! दोनों ही याचिका पर सुनवाई माननीय उच्च न्यायलय की एक सदस्यीय पीठ द्वारा ही की गयी।

7- याचिका संख्या WRIT-A-1476/2013 के निर्णय के अनुपालन में 49702 अभ्यार्थियों को भर्ती बोर्ड द्वारा सफल घोषित किया गया, इस आदेश के अनुपालन में भर्ती बोर्ड द्वारा उन अभ्यार्थियों को भी चयन किया गया जिन्होंने कुल 50% अंक प्राप्त नही किये!
8- प्रारम्भिक लिखित परीक्षा में घोषित (सफल)49702 अभ्यार्थियों के सापेक्ष 46578 अभ्यार्थियों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा हेतु बुलावा पत्र भेजा गया। 2524 अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण होते हुए भी बुलावा नही भेजा गया जिससे वे अपने रोजगार के अधिकार से वंचित हो गये।
9- याचिका संख्या WRIT-A-57576/2013 के अनुपालन में शारीरिक दक्षता परीक्षा 10 किमी० की बाध्यता के साथ दिनांक 04/08/2014 को शुरू हुई और 3/09/2014 समाप्त हुई जबकि उपनिरीक्षक भर्ती नियमावली के अनुसार शारीरिक दक्षता परीक्षा अधिकतम एक सप्ताह की समय सीमा में पूरी की जानी थी।
10- शारीरिक दक्षता परीक्षा में आई एस आई प्रमाणित उपकरण का प्रयोग नहीं किया गया जबकि उपनिरीक्षक भर्ती नियमावली 2008 के अनुसार उपकरण केवल आई एस आई प्रमाणित ही प्रयोग किये जाने थे,  इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय में याचिका संख्या WRIT A 613/2015 व अन्य 47 याचिकाएं लंबित है और भर्ती बोर्ड बार बार इस मुद्दे पर माननीय न्यायालय को गुमराह कर रहा है।
11- शारीरिक दक्षता परीक्षा में 15777 अभ्यर्थी सफल घोषित किये गये जिनकी मुख्य लिखित परीक्षा 14 सितम्बर 2014 को संपन्न हुई
12- मुख्य लिखित परीक्षा  में 14256 अभ्यार्थी सफल घोषित किये गये।
13-भर्ती प्रकिया के अगले चरण समूह परिसंवाद के लिये  विज्ञप्ति के अनुसार 4010 रिक्तियों के सापेक्ष तीन गुना अभ्यार्थियों को अर्थात 12030 अभ्यार्थियों को बुलाया जाना था परन्तु भर्ती बोर्ड द्वारा सभी सफल अभ्यार्थियों अर्थात 14256 अभ्यार्थियों को बुलाया गया।

14- मुख्य लिखित परीक्षामें जमकर नकल व व्हाइटनर का प्रयोग किया गया जिसके विरूद्ध याचिका संख्या WRIT-A-67782/2014 व 20 अन्य माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में दायर की गयी परन्तु इस याचिका पर निर्णय होने के पूर्व ही दिनांक 16/03/2015 को परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया।

15- याचिका संख्या WRIT-A-67782/2014 व 20 अन्य में माननीय न्यायधीश महोदय ने दिनांक 29/05/2015 को आदेश दिया कि व्हाइटनर, ब्लेड आदि का प्रयोग करने वाले अभ्यार्थी नियमावली अनुसार अयोग्य घोषित किये जाते है।

16- याचिका संख्या WRIT-A-67782/2014 व 20अन्य के आदेश के अनुपालन में भर्ती बोर्ड ने संसोधित परीक्षा परिणाम घोषित किया परन्तु इस याचिका में भर्ती बोर्ड द्वारा माननीय उच्च न्यायालय को बताया कि 3038 अभ्यार्थियों ने व्हाइटनर, ब्लेड आदि का प्रयोग किया परन्तु संसोधित परीक्षा परिणाम में ऐसे अभ्यार्थियों का भी चयन किया गया जिन्होंने माननीय उच्च न्यायालय में स्वीकार किया था कि हमने व्हाइटनर, ब्लेड आदि का प्रयोग किया है और हमारा अभ्यर्थन निरस्त न किया जाये ! भर्ती बोर्ड द्वारा माननीय उच्च न्यायलय के सम्मुख बतायी गयी संख्या 3038 के सापेक्ष 2880 अभ्यार्थियों को ही सूची प्रस्तुत की।

17- याचिका संख्या WRIT-A-67782/2014 के निर्णय के विरूद्ध याचिका संख्या SPECIAL APPEAL 437/2015 व 6 अन्य उच्च न्यायालय इलाहाबाद की दो सदस्यीय पीठ ने एक सदस्यीय पीठ के निर्णय को बराबर रखा।

18-याचिका संख्या SPECIAL APPEAL 437/2015 के निर्णय के विरूद्ध माननीय उच्चतम न्यायलय में S.P.L (CIVIL) 21843-21844/2015 दायर की गयी जिस पर माननीय उच्चतम न्यायालय के द्वारा माननीय उच्च न्यायलय के निर्णय पर कोई आदेश नही दिया और भर्ती बोर्ड द्वारा अयोग्य घोषित किये गये 810अभ्यार्थियों के समायोजन का प्रस्ताव यह कह कर पेश किया गया कि ये बहुत पढ़े लिखे और योग्य है, जिसे माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्वीकार कर लिया, याचिका के मूल मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं किया गया।

19- इस भर्ती में नकल, व्हाइटनर, ब्लेड आदि का प्रयोग करने व असफल अभ्यार्थियों को मुख्य लिखित परीक्षा में शामिल करने के कारण मुख्य लिखित परीक्षा पुनः कराने के लिए याचिका संख्या S.S. 5158/2015 दायर की गयी ! जिसमे माननीय न्यायधीश महोदय ने दिनांक 2 सितम्बर 2015 को न्यायलय की अनुमति के बिना नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी परन्तु भर्ती बोर्ड द्वारा सफल अभ्यार्थियों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया, जो स्पष्ट रूप से माननीय उच्च न्यायालय की अवहेलना है।

20- इस भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण को भी गलत तरीके से लागू किया जिसके विरूद्ध याचिका संख्या WRIT-A-37599 /2015 दायर की गयी, इस पर माननीय न्यायधीश महोदय ने दिनांक 16/03/2015 को आरक्षण को सही तरीके से लागू करने तथा जिम्मेवार अधिकारियो पर जुर्माना लगाने का आदेश दिया।
21-  भर्ती बोर्ड ने अन्य राज्यों की निवासी महिला अभ्यर्थियों को सामान्य पुरूष अभ्यर्थी में शामिल कर दिया जिससे अन्य राज्यों की महिला अभ्यर्थी योग्य होते हुए भी चयन से वंचित हो गयी। जिसके विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में याचिका संख्या WRIT A - 27845/2015 लम्बित है।

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD, LUCKNOW BENCH 

Court No. - 10 

Case :- SERVICE SINGLE No. - 5158 of 2015 

Petitioner :- Abhishek Kumar Singh & 3 Ors. 

Respondent :- State Of U.P. Through Prin. Secy. Deptt. Of Home Lko. & Ors. 

Counsel for Petitioner :- Vidhu Bhushan
Kalia,Ankit Pande,Birendra Pratap Singh,Laxmi Kant Pathak,Rajat Rajan Singh,Ravi Pratap Singh 

Counsel for Respondent :- C.S.C.,Abhishek Bose,Amit Bose,Dr L P Mishra,P.D.Verma,Pushkar Baghel,Vijay Kumar

Hon'ble Rajan Roy,J. 

Arguments of the learned counsel for the parties have been heard. 

Judgment/order is reserved. 

Permission is granted to the parties to file written submission/supplementary written submition, if any, within ten days. 

Order Date :- 26.5.2016 
A.Nigam 

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