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Monday, March 7, 2016

कई बार हड़ताल वापस होने को लेकर कर्मचारी अब आरपार की लड़ाई के मूड में, मांगों को लेकर सरकार की तरफ से कोई निर्णय न होने से आंदोलन होना तय, कर्मचारी संघो के साथ नियत बैठकें न होने से भी रोष


लखनऊ : नौ मार्च से राज्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से कामकाज ठप हो सकता है। दरअसल  लड़ने को मजबूर हैं। सोमवार को महाशिवरात्रि का अवकाश है और मंगलवार का दिन ही निर्णायक दिन साबित होगा। अगर सरकार के आश्वासनों से डिप्लोमा इंजीनियर और राज्य कर्मचारी संतुष्ट नहीं हुए तो विकास कार्यों के साथ ही दफ्तरों में भी कामकाज प्रभावित होने से इसका सीधा आम जन पर भी पड़ेगा।


दरअसल राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 23 फरवरी से हड़ताल की चेतावनी दी थी लेकिन सरकार की तरफ से मांगों को पूरा करने के मिले आश्वासन के बाद हड़ताल की तिथि में परिवर्तन करते हुए नौ मार्च कर दी गई थी लेकिन अभी मांगों को लेकर सरकार की तरफ से कोई निर्णय न होने से आंदोलन होना तय है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरी किशोर तिवारी कहते हैं कि राज्य कर्मचारियों की हड़ताल तय है, क्योंकि सरकार सिर्फ आश्वासन ही दे रही है। उनका कहना है कि 22 नवंबर 2013 से 28 जनवरी 2006 के बीच कई आदेश जारी कर हाईकोर्ट की पीठ राज्य कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने को कह चुकी है लेकिन सरकार ने किसी भी मांग को पूरा नहीं किया। इसी तरह 11 जनवरी 2013 से आठ फरवरी 2006 तक भी नौ बार शासन स्तर पर बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी कोई नतीजा सामने नहीं दिखा।


वह कहते हैं कि शासन ने निर्देश दिया था कि प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी कर्मचारी संगठनों से माह में एक बार वार्ता समस्याओं का निराकरण करेंगे लेकिन सूचना के अधिकार से मिली जानकारी से ही स्पष्ट है कि प्रमुख सचिव स्तर पर कर्मचारी संगठनों के साथ कोई बैठकें नहीं की गई थी।

📌 केंद्रीय कर्मचारियों की भांति समस्त भत्तों की समानता प्रदान की जाए।
📌 पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए। अभी तक का जमा राशि निश्चित लाभ के साथ प्रतिवर्ष घोषित किया जाए।
📌 पूर्व में लागू नकदीकरण व्यवस्था बहाल हो।
📌 कई संवर्ग ऐसे हैं जिसकी वेतन विसंगतियों के संबंध में रिजवी समिति ने संस्तुतियां नहीं की है। संवर्गो की वेतन विसंगतियों को समय बद्ध करते हुए मुख्य सचिव समिति द्वारा सुनवाई कर शीघ्र दूर किया जाए तथा रिजवी समिति की संस्तुतियों को यथावत लागू किया जाए।
📌 कर्मचारियों की 8, 16 व 24 वर्षो की सेवा पर तीन प्रोन्नति/प्रोन्नति का ग्रेड वेतनमान प्रदान किया जाए। एसीपी के निर्धारण में धारित पद की बाध्यता समाप्त करते हुए कुल सेवा के आधार पर वेतन का निर्धारण किया जाए तथा प्रत्येक संवर्ग के लिए उसके मूल पद के ग्रेड वेतन का अगला ग्रेड वेतन इग्नोर किया जाए।
📌 तकनीकी योग्यता संवर्गो को, न्यूनतम 4800 ग्रेड वेतन करने और गैर तकनीकी योग्यता वाले संवर्गो को, जिनकी शैक्षिक योग्यता स्नातक है, को कम से कम 4600 ग्रेड वेतन स्वीकृति किया जाए।
📌 उच्च पदों पर पदोन्नति हेतु परिवीक्षा अवधि पूर्णत: समाप्त की जाए।
📌 29 जून 1991 से पूर्व नियुक्त कुछ संवर्गो के दैनिक वेतनभोगी/ वर्कचार्ज व कार्यप्रभावित कर्मचारियों का विनियमितीकरण किया जाए।
📌 उच्च न्यायालय के निर्देश का पालन करते हुए चार मांगों के साथ अन्य मांगों पर तत्काल आदेश जारी किया जाए।
📌 एसजीपीजीआइ विभिन्न चिकित्सा विश्व विद्यालयों/ महाविद्यालयों के सम्बद्ध अस्पतालों एवं अन्य विशिष्ट संस्थानों आदि में नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाए।
📌4600 ग्रेड पे के एवं उससे ऊपर के ग्रेड पे वाले सभी पदों को राजपत्रित घोषित किया जाए।
📌विभागीय स्तर पर पोषक पद से उच्च पद पर विभागीय परीक्षा के आधार पर सीधी भर्ती के कोटे में 15 प्रतिशत पद भरे जाएं, जिसने उच्च पद की शैक्षिक योग्यता धारण कर रखा हो, न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की बाध्यता रखी जाए, जिससे विभागीय स्तर पर योग्य कर्मचारी भी उच्च पदों पर पदोन्नति पा सके।
📌 फील्ड कर्मचारियों को मोटर साइकिल भत्ता दिया जाए।
📌 अधिवर्षता आयु 62 की जाए।