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Wednesday, February 3, 2016

आरटीई कानून का मामला उच्च न्यायालय में फिर गूंजा, शिक्षा के अधिकार का पालन न होने पर मांगा जवाब



इलाहाबाद : प्रदेश में निश्शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून का मामला उच्च न्यायालय में फिर गूंजा। हाईकोर्ट ने सूबाई सरकार से जवाब-तलब किया है साथ ही चार सप्ताह में इस मामले में संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में कहा गया है कि आरटीई एक्ट के प्रावधान के तहत कम से कम 25 प्रतिशत बच्चों को निजी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश दिलाना जरूरी है। एक्ट की धारा 12 (1) (सी) में प्रावधान है कि आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के बच्चों को भी निजी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश दिया जाए।
अजय कुमार पटेल की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याची का कहना है कि सूबे के प्राथमिक स्कूलों में कक्षा एक में 56.53 लाख बच्चे पंजीकृत है। इसका 25 फीसद 6.37 लाख बच्चे होते हैं। मगर मौजूदा समय में करीब 2600 गरीब बच्चों को ही निजी स्कूलों में दाखिला मिलने की जानकारी है। प्रदेश सरकार ने शासनादेश जारी कर सभी बीएसए को निर्देश दिया है कि सरकारी स्कूलों में सीट उपलब्ध न होने पर ही निजी स्कूलों में दाखिला कराया जाए। इसी प्रकार से ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले बच्चों के लिए यह व्यवस्था लागू ही नहीं की गई है। याचिका पर अब 24 फरवरी को सुनवाई होगी।


HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD 

Chief Justice's Court 

Case :- PUBLIC INTEREST LITIGATION (PIL) No. - 3334 of 2016 

Petitioner :- Ajay Kumar Patel 

Respondent :- State Of U.P. And 2 Others 

Counsel for Petitioner :- Adarsh Bhushan,Arpan Srivastava 

Counsel for Respondent :- C.S.C.,Nisheeth Yadav 

Hon'ble Dr. Dhananjaya Yeshwant Chandrachud,Chief Justice 

Hon'ble Yashwant Varma,J. 

The statistics which have been disclosed by the public interest petitioner indicate that out of a total of 56.53 lac enrolments of students for Class I in primary schools in the State of Uttar Pradesh, 6.37 lac enrolments representing the quota of 25% percent prescribed under Section 12(1)(c) of the Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 should have been filled up. However, it has been stated that only 2817 admissions were confirmed under Section 12(1)(c) as on 5 June 2015. 

Statistics apart, the important issue which the petition raises is whether the provisions of Section 12(1)(c) are being complied with in the State of Uttar Pradesh. The grievance of the petitioner is two fold. Firstly, it has been submitted on the basis of the Government Orders dated 3 December 2012 and 6 January 2015 that the Basic Education Officers are directing that it is only where no seats are available in Government Schools that the provisions of Section 12(1)(c) should be complied. 

Secondly, it has been urged that as a result of an artificial distinction between urban and rural wards, Section 12(1)(c) is being applied only to urban wards with the result that the rural population is not obtaining the benefit of the provision. Both these aspects are matters on which a short counter affidavit would be necessary by the Secretary, Basic Education. The short counter affidavit shall be filed within a period of one month from today. 

The petition shall now be listed under the same caption on 24 February 2016. 

Order Date :- 27.1.2016
VMA
(Dr. D.Y. Chandrachud, C.J.) 
(Yashwant Varma, J.)