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Wednesday, February 3, 2016

अब दो रुपये में देख सकेंगे जंची उत्तर पुस्तिका मुख्य सूचना आयुक्त ने शिक्षण संस्थानों को दिया निर्देश, एक पेज के लिए दो रुपये से अधिक नहीं ले सकते

इलाहाबाद : परीक्षा के बाद मूल्यांकित उत्तरपुस्तिका को देखने के लिए छात्रों को अधिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। मुख्य सूचना आयुक्त (सीआइसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों को छात्रों की सहूलियत के लिए कई निर्देश दिए हैं। इसके तहत अब महज दो रुपये में ही छात्र मूल्यांकन की हुई उत्तर पुस्तिका देख सकेंगे।

सीआइसी ने अपने 15 जनवरी के आदेश में यह स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय उत्तर पुस्तिका के लिए दो रुपये से अधिक नहीं वसूल सकते। यह आदेश दिल्ली विश्वविद्यालय के एक छात्र आब्ने इंगिती की ओर से की गई अपील पर सुनवाई करते हुए दी गई है। एक अनुमान के मुताबिक कई विश्वविद्यालय एक उत्तर पुस्तिका दिखाने के लिए छात्रों से पांच सौ से एक हजार रुपये तक वसूलते हैं।

सीआइसी श्रीधर अचायरुलु का कहना है कि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इतने अधिक शुल्क वसूलने से छात्र दो समूह में बंट गए हैं। एक वह जो इस रकम का भुगतान कर उत्तर पुस्तिका देख लेते हैं और दूसरे जो इसका भुगतान कर पाने में असक्षम हैं। उन्होंने अपने आदेश में यह भी कहा है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के अधिकार का पूरी तरह से उल्लंघन है।

सीआइसी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज को इस आदेश से अवगत कराते हुए सभी शिक्षण संस्थानों को सकरुलेट करने को कहा है। इसके अलावा मानव संसाधन विकास मंत्रलय को भी इस बाबत अनिवार्य आदेश बनाने को कहा है।

इविवि में दस रुपये में देखें कापी
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फिलहाल एक उत्तर पुस्तिका को देखने का शुल्क दस रुपये निर्धारित है। अब जब सीआइसी ने यह आदेश जारी किया है तो जल्द ही विश्वविद्यालय में भी बदलाव हो सकता है।

उत्तर पुस्तिका की मिलेगी फोटो कॉपी
इविवि में अभी तक छात्रों को मूल्यांकन की हुई उत्तर पुस्तिका की फोटो कॉपी नहीं मिल पाती थी। इसका प्रमुख कारण है कि फोटो कॉपी देने का शुल्क अभी तक निर्धारित नहीं हो पाया है। परीक्षा नियंत्रक प्रो.एचएस उपाध्याय ने बताया कि शुल्क निर्धारित करने के लिए समिति का गठन कर दिया गया है। जल्द ही समिति अपनी रिपोर्ट दे देगी।

गरीब छात्रों को होगा फायदा
मूल्यांकन की हुई उत्तर पुस्तिका को दिखाने के लिए निर्धारित हुए नए शुल्क से गरीब वर्ग के छात्रों को अधिक फायदा होगा। शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर भी रोक लग सकेगा।