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Wednesday, January 6, 2016

वीआरएस के लिए नहीं चलेगा प्राइवेट डॉक्टरों का प्रमाणपत्र, अब राज्य चिकित्सा परिषद का प्रमाणपत्र देना अनिवार्य

📌 पीएमएस डॉक्टरों के वीआरएस लेने के नियम कड़े

लखनऊ। प्रदेश सरकार ने प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग (पीएमएस) के डॉक्टरों के चिकित्सीय आधार पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने के नियम कड़े कर दिए हैं। अब वीआरएस के प्रार्थना पत्र के साथ प्राइवेट डॉक्टरों के प्रमाणपत्र नहीं चलेंगे। डॉक्टरों को राज्य चिकित्सा परिषद की संस्तुति एवं प्रमाणपत्र की जरूरत होगी।

प्रदेश सरकार ने मंगलवार को इस बाबत औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। अभी तक पीएमएस डॉक्टर किसी भी प्राइवेट डॉक्टर से प्रमाण पत्र लेकर चिकित्सीय आधार पर वीआरएस लेने के लिए आवेदन कर देते थे। प्राइवेट डॉक्टर बगैर पूरा स्वास्थ्य परीक्षण किए प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। बाद में इसी आधार पर इन्हें वीआरएस मिल जाता था। लेकिन अब सरकार ने आवेदन के साथ राज्य चिकित्सा परिषद का प्रमाणपत्र लगाना अनिवार्य कर दिया है।

विशेष सचिव स्वास्थ्य मानवेन्द्र सिंह ने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के अलावा मंडलीय अपर निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे राज्य चिकित्सा परिषद के प्रमाणपत्र के बगैर किसी भी वीआरएस के प्रार्थनापत्र को अग्रसारित न करें। यदि इसके बगैर कोई भी व्यक्ति प्रार्थनापत्र भेजेगा तो उस पर विचार नहीं किया जाएगा।