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Friday, September 18, 2015

नए शासनादेश ने बढ़ाई पेंशनरों की मुश्किल, चिकित्सा प्रतिपूर्ति भत्ता अब विभागाध्यक्ष के जरिए जाएगा आहरण-वितरण अधिकारी के पास

चिकित्सा प्रतिपूर्ति भत्ता अब विभागाध्यक्ष के जरिए जाएगा आहरण-वितरण अधिकारी के पास

नए शासनादेश ने बढ़ाई पेंशनरों की मुश्किल

वृद्ध और अशक्त पेंशनरों की सुविधा का हवाला देकर शासन ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान की व्यवस्था को अब सीधे कोषागार की जगह विभागीय आहरण-वितरण अधिकारी के जरिए करने का आदेश जारी किया है। लेकिन इस आदेश ने पेंशनरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जो कार्य पहले एक जगह से हो जाता था, अब उसके लिए दो-तीन चौखटों पर चक्कर लगाना पड़ सकता है। इससे भुगतान में विलंब की पूरी संभावना है। पेंशनरों ने पूर्व व्यवस्था को फिर बहाल करने की मांग शासन से की है।

चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान के मामले में जुलाई तक जो व्यवस्था थी, उसके मुताबिक चिकित्सा व्यय का स्वीकृत आदेश संबंधित विभाग से प्राप्त होने पर पेंशनर को प्रपत्र संख्या 106 भरकर उस कोषाधिकारी को देना होता था, जिस कोषागार से उसे पेंशन मिलती है। कोषाधिकारी संबंधित पेंशनर के खाते में ई-पेमेंट के जरिए स्वीकृत धनराशि भिजवा देते थे। मगर 31 जुलाई 2015 को जारी शासनादेश के बाद से उक्त व्यवस्था खत्म हो गई। अब प्रपत्र 106 को पेंशनरों को अपने विभाग के आहरण-वितरण अधिकारी के पास देना होगा। जिसे अधिकारी अपने हस्ताक्षर के बाद कोषाधिकारी को भेजेंगे। हालांकि, इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र के पेंशनरों को आ रही है, जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, ब्लॉक आदि से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्हें तो चिकित्सा खर्च संबंधी स्वीकृत आदेश प्रपत्र 106 के साथ उस विभाग में जमा करना पड़ेगा, जहां से रिटायर हुए हैं। प्रभारी अधिकारी संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी को भुगतान संबंधी दावे को भेजेंगे, जिसे वह कोषाधिकारी के पास भेजेंगे। ऐसे में पेंशनर को भुगतान मिलने में काफी समय लग सकता है।

सेवानिवृत्त कर्मचारी/पेंशनर एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव ने पूर्व व्यवस्था को फिर बहाल करने की मांग की है ताकि पेंशनरों को असुविधा न हो। चिकित्सा प्रतिपूर्ति भत्ता अब विभागाध्यक्ष के जरिए जाएगा आहरण-वितरण अधिकारी के पास1

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