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Friday, August 21, 2015

कोटे से प्रमोशन वालों का डिमोशन शुरू, 5 सितंबर तक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश, कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने कैबिनेट बाई सर्कुलेशन किया फैसला

  • कोटे से प्रमोशन वालों का डिमोशन शुरू
  • 5 सितंबर तक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश
  • कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने कैबिनेट बाई सर्कुलेशन किया फैसला
  • सरकार को मिला तीन हफ्ते का वक्त
  • 20,000 अधिकारी-कर्मचारी होंगे प्रभावित
यूपी सरकार ने कोटे से प्रमोशन पाने वालों का डिमोशन शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद यूपी सरकार ने बृहस्पतिवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन यह फैसला लिया। पदोन्नति में आरक्षण संबंधी अदालती आदेश पर अमल न करने पर शीर्ष अदालत ने यूपी के मुख्य सचिव को लताड़ लगाई और तीन हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। वैसे तो सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर तक का वक्त दिया है, लेकिन शासन ने सभी विभागों को 5 सितंबर तक डिमोशन की कार्यवाही पूरी करके रिपोर्ट देने को कहा है। 
सिंचाई विभाग के अलावा पदोन्नति में आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के आधार पर प्रोन्नति पाने वाले अन्य विभागों के अफसरों व कर्मचारियों पर इसका असर पड़ेगा।सरकार के इस फैसले से करीब 20 हजार अधिकारी-कर्मचारी डिमोट हो जाएंगे। अगर फैसला 1997 से लागू होता तो संख्या डेढ़ लाख से ऊपर पहुंच सकती थी, लेकिन बहुत से लोग रिटायर हो गए और 2007 से प्रमोशन नहीं हुए। इनमें भी अधिकतर के वेतन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ये सिर्फ मौजूदा पदों से इधर-उधर होंगे। मुख्य सचिव आलोक रंजन पहले ही साफ कर चुके हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के तहत जो लोग प्रभावित होंगे, उनके वेतन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस आदेश पर अमल करके मुख्य सचिव को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करना था। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा डिमोशन पर रोक लगा देने से सरकार आगे कदम नहीं बढ़ा पा रही थी। बुधवार को हाईकोर्ट द्वारा रोक हटा लिए जाने के बाद सरकार ने यह फैसला ले लिया। 
  • आदेश पर अमल न करने से शीर्ष कोर्ट नाखुश, मुख्य सचिव को चेतावनी
नई दिल्ली (ब्यूरो)। पदोन्नति में आरक्षण को लेकर अदालती फैसले पर उत्तर प्रदेश द्वारा दाखिल अनुपालन रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने यूपी के मुख्य सचिव को तीन हफ्ते के भीतर हलफनामे के जरिए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर तय समय में हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो मुख्य सचिव को अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।


रोन्नति में आरक्षण का लाभ पाने वालों को पदावनत करने के संबंध में गुरुवार को उच्चतम न्यायालय के कड़े रुख के बाद हरकत में आई अखिलेश यादव सरकार ने आनन-फानन में कैबिनेट बाई सरकुलेशन के जरिए सभी विभागों में पदोन्नत किए गए कार्मिकों को पदावनत करने का निर्णय किया है। 
सूत्रों के अनुसार गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने अब इस मामले में कोई विलंब न करने का फैसला किया है। कैबिनेट बाई सरकुलेशन के जरिए सभी प्रोन्नत कार्मिकों के पदावनत करने के निर्णय के बाद जल्द ही अब संबंधित विभागों द्वारा इस बारे में शासनादेश जारी कर निर्णय का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि समय सीमा के भीतर सरकार सुप्रीम कोर्ट में आदेश के अनुपालन का शपथ पत्र दाखिल कर सके।
आरक्षण का लाभ लेकर प्रोन्नत हुए एससी-एसटी कर्मचारियों को पदावनत करने में तीन साल से टालमटोल कर रही उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीमकोर्ट ने गुरुवार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने प्रदेश सरकार के लिए आदेश पर अमल की सीमा रेखा खींच दी है, जिसके मुताबिक राज्य सरकार को प्रदेश के सभी महकमों में आरक्षण का लाभ पाकर प्रोन्नत हुए अधिकारियों को 15 सितंबर तक पदावनत करना होगा। इतना ही नहीं, राज्य सरकार पदावनत किए गए अधिकारियों को कोई अतिरिक्त कार्यभार भी नहीं देगी। कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को 15 सितंबर तक हलफनामा दाखिल कर आदेश पर अमल का ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया है। ये आदेश न्यायमूर्ति दीपक मिश्र व न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ लंबित अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिए।


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